साँसों में भी है ख़लिश बह रहीराहतों को तलाशें अब कहाँ?इश्क़ में तेरे जो मिले फ़ासलेदर्द ढूँढ़े वहीं मेरा पता
हम तेरे होते तोज़ख़्म सभी सिले होते तोहाँ, तुम मेरे होते तोबेवक़्त ना मिले होते तो
क्यूँ तेरे-मेरे दरमियाँरहता है जैसे एक निशाँ?क्यूँ तेरे-मेरे दरमियाँठहरी है जैसे दास्ताँ?दरमियाँ
अनकहे इरादों का, आधे लिखे उन वादों कामुझ पर असर तो है, असर तो हैहाँ, राह हमसे ये कहे, बनके मुसाफ़िर ही रहेंआगे सफ़र तो है, सफ़र तो है
कि हम ख़्वाबों में ही ढूँढ़ें मरहमतुम जहाँ मेरे पास हो हमदमजो फिर मिलेंगे कहींआँखों ही आँखों में तुमसे पूछ लेंगे हम
कि तुम मेरे होते तोबेवक़्त ना मिले होते तो
क्यूँ तेरे-मेरे दरमियाँरहता है जैसे एक निशाँ?क्यूँ तेरे-मेरे दरमियाँठहरी है जैसे दास्ताँ?
Oh, सीने में दबी हो जैसे ज़र्द यादेंजैसे हवा में घुली हो तेरी-मेरी बातेंइक जहाँ में सूनी राहों के दरमियाँसाँसों से जुड़े हैं जैसे कई धागेतेरे होने से ज़्यादा कहाँ कुछ माँगेतू जो नहीं है, कुछ नहीं है दरमियाँहो, दरमियाँ