है क्या तड़प? है ये कैसी सज़ा?क्यूँ ग़म की आग में तू जल रहा?
माना, है टूटा तू, ख़ुद से है छूटा तूख़ुद को तू ख़ुद से मिलाज़ख़्मी परिंदा है, फिर भी तू ज़िंदा हैमान ले कहना मेरा
तेरा-मेरा रिश्ता पुरानातेरा-मेरा रिश्ता पुरानातेरा-मेरा रिश्ता पुराना
क्यूँ ज़िंदगी से तू इतना ख़फ़ा?फिर से इसे ले गले से लगा
जो भी उजड़ गया, तुझसे बिछड़ गयाउसको तू दे भी भुलातेरा सुकून तो तेरे ही पास हैफिर कहीं क्यूँ ढूँढना?
तेरा-मेरा रिश्ता पुरानातेरा-मेरा रिश्ता पुराना
है क्या तड़प? है ये कैसी सज़ा?क्यूँ ग़म की आग में तू जल रहा?
ख़ुद को ना यूँ सता, उसको दे बुझाचाहता यही आसमाँअब तेरे प्यार में, दिल के क़रार मेंशामिल तू कर ले जहाँ
तेरा-मेरा रिश्ता पुरानातेरा-मेरा रिश्ता पुरानातेरा, ओ, मेरा रिश्ता पुराना